Ganpati Namaskarah / श्री गणपति नमस्कारः

Shri Ganpati Namaskarah
श्री गणपति नमस्कारः


विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय ।

नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते ।। 1 ।।

अर्थात् :- विघ्नेश्वर, वर देने वाले, देवताओं को प्रिय, लम्बोदर, कलाओं से परिपूर्ण, जगत् का हित करने वाले, गज के समान मुखवाले और वेद तथा यज्ञ से विभूषित पार्वती पुत्र को नमस्कार है ; हे गणनाथ ! आपको नमस्कार है।

गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम् ।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् ।। 2 ।।

अर्थात् :- जो हाथी के समान मुखवाले हैं, भूतगणादि से सदा सेवित रहते हैं, कैथ और जामुन फल जिनके लिये प्रिय भोज्य हैं, पार्वती के पुत्र हैं तथा जो प्राणियों के शोक का विनाश करने वाले हैं, उन विघ्नेश्वर के चरण कमलों में नमस्कार करता हूँ।

एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम् ।
विघ्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम् ।। 3 ।।

अर्थात् :- जो एक दाँत से सुशोभित हैं, विशाल शरीर वाले हैं, लम्बोदर हैं, गजानन हैं तथा जो विघ्नों के विनाशकर्ता हैं, मैं उन दिव्य भगवान् हेरम्ब को प्रणाम करता हूँ।

रक्ष रक्ष गणाध्यक्ष रक्ष त्रैलोक्यरक्षक ।
भक्तानामभयं कर्ता त्राता भव भवार्णवात् ।। 4 ।।

अर्थात् :- हे गणाध्यक्ष ! [ मेरी ] रक्षा कीजिये, रक्षा कीजिये। हे तीनों लोकों के रक्षक ! रक्षा कीजिये ; आप भक्तों को अभय प्रदान करने वाले हैं, भवसागर से [ मेरी ] रक्षा कीजिये।

।। इस प्रकार श्रीगणपतिनमस्कार सम्पूर्ण हुआ ।।

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