Shri Radha Ashtakam / श्री राधा अष्टकम्

Shri Radha Ashtakam

Shri Radha Ashtakam, श्री राधा अष्टकम् :- श्रीराधिके ! यद्यपि श्यामसुन्दर श्रीकृष्ण स्वयं ही ऐसे हैं कि उनके चारुचरणों का चिन्तन किया जाय, तथापि वे तुम्हारे चरणचिह्नों के अवलोकन की बड़ी लालसा रखते हैं। देवि ! मैं नमस्कार करता हूँ। इधर मेरे अन्तःकरण के हृदय-देश में ज्योतिपुंज बिखेरते हुए अपने चिन्तनीय चरणारविन्द का मुझे दर्शन कराओ। दामोदर प्रिया श्रीराधा की स्तुति से सम्बन्ध रखने वाले इन आठ श्लोकों का जो लोग सदा इसी रूप में पाठ करते हैं, वे श्रीकृष्णधाम वृन्दावन में युगल सरकार की सेवा के अनुकूल सखी-शरीर पाकर सुख से रहते हैं।

Shri Radha Stotram / श्री राधा स्तोत्रम्

Shri Radha Stotram

Shri Radha Stotram, श्री राधा स्तोत्रम् :- जो मनुष्य भक्तिपूर्वक इस उद्धवकृत स्तोत्र का पाठ करता है; वह इस लोक में सुख भोगकर अन्त में वैकुण्ठ में जाता है। उसे बन्धुवियोग तथा अत्यन्त भयंकर रोग और शोक नहीं होते। जिस स्त्री का पति परदेश गया होता है, वह अपने पति से मिल जाती है और भार्यावियोगी अपनी पत्नी को पा जाता है। पुत्रहीन को पुत्र मिल जाते हैं, निर्धन को धन प्राप्त हो जाता है, भूमिहीन को भूमि की प्राप्ति हो जाती है, प्रजाहीन प्रजा को पा लेता है, रोगी रोग से विमुक्त हो जाता है।

Radha Shodash Naam Stotram / राधा षोडश नाम स्तोत्रम्

Radha Shodash Naam Stotram

Radha Shodash Naam Stotram, राधा षोडश नाम स्तोत्रम् :- नियमपूर्वक किये गये सम्पूर्ण व्रत, दान और उपवास से, चारों वेदों के अर्थसहित पाठ से, समस्त यज्ञों और तीर्थों के विधिबोधित अनुष्ठान तथा सेवन से, सम्पूर्ण भूमि की सात बार की गयी परिक्रमा से, शरणागत की रक्षा से, अज्ञानी को ज्ञान देने से तथा देवताओं और वैष्णवों का दर्शन करने से भी जो फल प्राप्त होता है, वह इस स्तोत्रपाठ की सोलहवीं कला के बराबर नहीं है। इस स्तोत्र के प्रभाव से मनुष्य जीवन्मुक्त हो जाता है।

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