Surya Shashti Vrat Katha / सूर्य षष्ठी व्रत कथा और पूजा

Surya Shashti Vrat Katha Aur Puja Vidhi
सूर्य षष्ठी व्रत कथा और पूजा विधि


Surya Shashti Vrat Katha Aur Puja Vidhi, सूर्य षष्ठी व्रत कथा और पूजा विधि :- कार्तिक मास की शुक्ला षष्ठी को यह व्रत मनाया जाता है।

सूर्य षष्ठी पूजा विधि :-

इस दिन सूर्य देवता की पूजा का विशेष माहात्म्य है। इसे करने वाली स्त्रियाँ धन-धान्य, पति-पुत्र तथा सुख-समृद्धि से परिपूर्ण तथा संतुष्ट रहती हैं। चर्म रोग और आँख की बीमारी से भी सबको छुटकारा मिल जाता है।

पूजा तथा अर्घ्यदान देते समय सूर्य-किरण अवश्य देखना चाहिए। पूजन विधि में फल, पकवान, मिष्टान्न, आदि का महत्त्व है।

सूर्य षष्ठी व्रत कथा :-

प्राचीन समय में बिन्दुसर तीर्थ में महीपाल नाम का एक वणिक् रहता था। वह धर्म-कर्म व देवता का विरोधी था। एक बार उसने सूर्य भगवान् की प्रतिमा के सामने होकर मल-मूत्र का त्याग किया, जिसके परिणामस्वरूप उसकी दोनों आँखें जाती रहीं।

एक दिन अपने आततायी जीवन से ऊब कर गंगा जी में कूद कर प्राण देने का निश्चय कर चल पड़ा। रास्ते में उसे ऋषिराज नारद जी मिले और पूछा — कहिये सेठ ! कहाँ जल्दी-जल्दी भागे जा रहे हो ?

अँधा सेठ रो पड़ा और सांसारिक सुख-दुःख की प्रताड़ना से प्रताड़ित हो प्राण-त्याग करने का इरादा बतलाया।

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