Chanakya niti chapter two 2 / चाणक्य नीति द्वितीय अध्याय

Chanakya niti chapter two

Chanakya niti chapter two, चाणक्य नीति द्वितीय अध्याय :- इस श्लोक में आचार्य श्री ने अतिथि को चेताया है कि वह अपने सम्मान की रक्षा के लिए गृहस्थी का घर भोजनोपरांत तुरन्त छोड़ दे, वहाँ डेरा जमाने की चेष्टा न करे। कुछ लोग किसी के अतिथि बनकर जाते हैं और वहाँ की सुख-सुविधाओं अथवा सु-स्वादिष्ट पकवानों के लोभ में वहीं जमे रहते हैं यह ठीक नहीं है, उन्हें अपमानित होना पड़ सकता है।

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