Bhawani Stuti / भवानी स्तुति

Bhawani Stuti

Bhawani Stuti, भवानी स्तुति :- हे देवि ! तुम दुःसह दोष और दुःखों का दमन करने वाली हो, मुझ पर दया करो। तुम विश्व-ब्रह्माण्ड की मूल (उत्पत्ति-स्थान) हो, भक्तों पर सदा अनुकूल रहती हो, दुष्टदलन के लिये हाथ में त्रिशूल धारण किये हो और सृष्टि की उत्पत्ति करने वाली मूल (अव्याकृत) प्रकृति हो। तुम चण्ड दानव के भुजदण्डों का खण्डन करने वाली और महिषासुर को मारने वाली हो, मुण्ड दानव के घमण्ड का नाश कर तुम्हीं ने उसके अंग-प्रत्यंग तोड़े हैं।

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