Lakshmi Stotram / लक्ष्मी स्तोत्रम्

Lakshmi Stotram

Lakshmi Stotram, लक्ष्मी स्तोत्रम् :- हे अम्बिके ! सदा प्रसन्न रहना तुम्हारा स्वाभाविक गुण है। अतः मुझ पर प्रसन्न हो जाओ। सनातनी ! मेरा राज्य शत्रुओं के हाथ में चला गया है, तुम्हारी कृपा से वह मुझे पुनः प्राप्त हो जाय। यह स्तोत्र महान् पवित्र है। इसका त्रिकाल पाठ करने वाला बड़भागी पुरुष कुबेर के समान राजाधिराज हो सकता है। पाँच लाख जप करने पर मनुष्यों के लिये यह स्तोत्र सिद्ध होता है। यदि इस सिद्धस्तोत्र का कोई निरन्तर एक महीने तक पाठ करे तो वह महान् सुखी एवं राजेन्द्र हो जायगा- इसमें कोई संशय नहीं है।

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