Utpaat Nashan Ganesh Stotra / उत्पात नाशन गणेश स्तोत्र

Utpaat Nashan Ganesh Stotram
उत्पात नाशन गणेश स्तोत्रम्


नाथस्त्वमसि देवानां मनुष्योरगरक्षसाम् ।। 1 ।।

यक्षगन्धर्वविप्राणां गजाश्वररथपक्षिणाम् ।
भूतभव्यभविष्यस्य बुद्धीन्द्रियगणस्य च ।। 2 ।।

हर्षस्य शोकदुःखस्य सुखस्य ज्ञानमोहयोः ।
अर्थस्य कार्यजातस्य लाभहान्योस्तथैव च ।। 3 ।।

स्वर्गपाताललोकानां पृथिव्या जलधेरपि ।
नक्षत्राणां ग्रहाणां च पिशाचानां च विरुधाम् ।। 4 ।।

वृक्षाणां सरितां पुंसां स्त्रीणां बालजनस्य च ।
उत्पत्तिस्थितिसंहारकारिणे ते नमो नमः ।। 5 ।।

अर्थात् :- [ हे प्रभो ! ] आप देवता, मनुष्य, नाग, राक्षस, यक्ष, गन्धर्व, विप्र, गज, अश्व, रथ, पक्षी, भूत, वर्तमान, भविष्य, बुद्धि, इन्द्रियसमूह, हर्ष, शोक, दुःख, सुख, ज्ञान, मोह, अर्थ, समस्त कार्य, लाभ, हानि, स्वर्ग तथा पाताल आदि लोक, पृथ्वी, समुद्र, नक्षत्र, ग्रह, पिशाच, वनस्पति, वृक्ष, नदी, पुरुष, स्त्री एवं बालक – इन सभी के स्वामी हैं। सृष्टि, पालन तथा संहार करने वाले आप [ गणेश ] – को बार-बार नमस्कार है।

पशूनां पतये तुभ्यं तत्त्वज्ञानप्रदायिने ।
नमो विष्णुस्वरूपाय नमस्ते रुद्ररूपिणे ।। 6 ।।

अर्थात् :- [ जीव रूपी ] पशुओं के पति तथा तत्त्व ज्ञान प्रदान करने वाले आपको नमस्कार है। विष्णु स्वरुप तथा रूद्र स्वरुप आपको नमस्कार है।

नमस्ते ब्रह्मरूपाय नमोऽनन्तस्वरूपिणे ।
मोक्षहेतो नमस्तुभ्यं नमो विघ्नहराय ते ।। 7 ।।

अर्थात् :- ब्रह्म स्वरुप आपको नमस्कार है। अनन्त स्वरुप आपको नमस्कार है। हे मोक्षहेतो ! आपको नमस्कार है। विघ्नों का नाश करने वाले आपको नमस्कार है।

नमोऽभक्तविनाशाय नमो भक्तप्रियाय च ।
अधिदैवाधिभूतात्मंस्तापत्रयहराय ते ।। 8 ।।

अर्थात् :- अभक्तों का नाश करने वाले आपको नमस्कार है तथा भक्तों के लिये प्रिय आपको नमस्कार है।

सर्वोत्पातविघाताय नमो लीलास्वरूपिणे ।
सर्वान्तर्यामिणे तुभ्यं सर्वाध्यक्षाय ते नमः ।। 9 ।।

अर्थात् :- आधिदैविक, आधिभौतिक तथा आध्यात्मिक – इन तीनों प्रकार के तापों का हरण करने वाले आपको नमस्कार है। समस्त उपद्रवों का नाश करने वाले तथा लीला स्वरुप आपको नमस्कार है। आप सर्वान्तर्यामी को नमस्कार है। आप सर्वाध्यक्ष को नमस्कार है।

अदित्या जठरोत्पन्न विनायक नमोऽस्तु ते ।
परब्रह्मस्वरूपाय नमः कश्यपसूनवे ।। 10 ।।

अर्थात् :- देवी अदिति के गर्भ से उत्पन्न हे विनायक ! आपको नमस्कार है। आप परब्रह्म स्वरुप कश्यप पुत्र को नमस्कार है।

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