Vaikuntha Chaturdashi Vrat Katha / वैकुण्ठ चतुर्दशी व्रत

Vaikuntha Chaturdashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi
वैकुण्ठ चतुर्दशी व्रत कथा और पूजा विधि


Vaikuntha Chaturdashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, वैकुण्ठ चतुर्दशी व्रत कथा और पूजा विधि :- कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को यह व्रत मनाया जाता है। इस तिथि को वैकुण्ठ वासी भगवान् श्री विष्णु की विधिवत् अर्चना की जाती है।

वैकुण्ठ चतुर्दशी पूजा विधि :-

इस तिथि को वैकुण्ठ वासी भगवान् श्री विष्णु की विधिवत् पूजा अर्चना कर व्रत किया जाता है। इस दिन प्रातः काल स्नान आदि करके भगवान् विष्णु और माँ लक्ष्मी की विधिवत् पूजा करके व्रत का संकल्प लें। प्रसन्न मन चित्त से भगवान् विष्णु को पुष्प, धूप-दीप, चन्दन आदि सुगन्धित पदार्थों से आरती करें। स्नान आचमन कराके बालभोग लगावें। ब्राह्मण को दान दक्षिणा दें।

वैकुण्ठ चतुर्दशी व्रत कथा :-

एक बार नारद जी मृत्युलोक घूमकर बैकुण्ठ पहुँचे। भगवान् विष्णु ने प्रसन्नतापूर्वक बैठाते हुए आने का कारण पूछा।

नारद जी ने कहा — भगवन् ! आपने अपना नाम तो कृपानिधान रख लिया है किन्तु इससे तो केवल आपके प्रिय भक्त ही तर पाते हैं, सामान्य नर-नारी नहीं। इसलिए आप कृपा करके ऐसा सुलभ मार्ग बतायें जिससे लोक के निम्न स्तरीय भक्त भी मुक्ति पा सकें।

इस पर भगवान् बोले — हे नारद ! सुनो, कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को जो नर-नारी व्रत का पालन करते हुए श्रद्धा-भक्ति से पूजा करेंगे उनके लिए साक्षात् स्वर्ग होगा। इसके बाद जय-विजय ने भी बताया कि इस दिन जो मनुष्य किंचित मात्र भी मेरा नाम लेकर पूजन करेगा, उसे बैकुण्ठ धाम मिलेगा।

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