Vaman Dwadashi Vrat Katha / वामन द्वादशी व्रत कथा और पूजा

Vaman Dwadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi
वामन द्वादशी व्रत कथा और पूजा विधि


Vaman Dwadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, वामन द्वादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- भाद्र शुक्ल की द्वादशी वामन द्वादशी कहलाती है। इस दिन सुवर्ण या यज्ञोपवीत से वामन भगवान् की प्रतिमा स्थापित कर सुवर्ण पात्र से अर्घ्य दान करें, फल-फूल चढ़ावें तथा उपवास करें।

वामन द्वादशी पूजा विधि :-

वामन  द्वादशी के दिन प्रातःकाल स्नान आदि करने के उपरान्त भगवान वामन की प्रतिमा कर सुवर्ण पात्र से अर्घ्य दान करें, फल-फूल चढ़ावें तथा उपवास करें।

पूजन का मन्त्र है —

देवेश्वराय देवाय, देवसंभूतिकारिणे ।
प्रभावे सर्वदेवानां वामनाय नमो नमः ।।

अर्घ्य के मन्त्र —

नमस्ये पद्मनाभाय नमस्ते जलशायिने ।
तुभ्यमर्घ्यं प्रयच्छामि बलवामनरूपिणे ।। 1 ।।

नमः शाङ्र्गधनुष्पाणि पाणये वामनाय च ।
यज्ञभुक् फलदात्रे च वामनाय नमो नमः ।। 2 ।।

इसकी पूजा में दूसरा विधान भी है कि पूजा के बाद 52 पेड़ा और 52 दक्षिणा रख कर भोग लगावें , फिर एक डलिया में रखकर 1 कटोरी चावल, 1 कटोरी शरबत, 1 कटोरी चीनी, 1 कटोरी दही ब्राह्मण को दान देवें। इसी दिन उजमन ( व्रत-समाप्ति उत्सव ) भी करें। उजमन में ब्राह्मणों को 1 माला 1 गउमुखी, कमण्डल, लाठी, आसन, गीता, फल, छाता, खड़ाऊँ तथा दक्षिणा देवें। इस व्रत के करने पर स्वर्ग की प्राप्ति होती है।   

शास्त्रों के अनुसार, असुरराज राजा बली ने अपने तेज और प्रताप के दम पर तीनों लोकों पर अपना अधिकार कर लिया था। राजा बलि पूजा-पाठ और दान-पुण्य बहुत करता था और जो भी उसके द्वार पर जाता है, उसे खाली हाथ नहीं जाने देता था। भगवान् विष्णु ने राजा बलि की परीक्षा लेने के लिए वामन अवतार लिया और उसके महल में गए, जहाँ यज्ञ हो रहा था। तब राजा बलि की परीक्षा लेने के लिए वामन देव आपको क्या चाहिए। तब वामन देव ने कहा कि मुझे तीन पग जमीन चाहिए।

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