Vighna Nashak Ganesh Stotram / विघ्न नाशक गणेश स्तोत्रम्

Vighna Nashak Ganesh Stotram
विघ्न नाशक गणेश स्तोत्रम्


श्रीराधिका उवाच
परं धाम परं ब्रह्म परेशं परमीश्वरम् ।
विघ्ननिघ्नकरं शान्तं पुष्टं कान्तमनन्तकम् ।। 1 ।।

सुरासुरेन्द्रैः सिद्धेन्द्रैः स्तुतं स्तौमि परात्परम् ।
सुरपद्मदिनेशं च गणेशं मङ्गलायनम् ।। 2 ।।

अर्थात् :- श्रीराधिका ने कहा — जो परम धाम, परब्रह्म, परेश, परम ईश्वर, विघ्नों के विनाशक, शान्त, पुष्ट, मनोहर और अनन्त हैं ; प्रधान-प्रधान सुर, असुर और सिद्ध जिनका स्तवन करते हैं ; जो देवरूपी कमल के लिये सूर्य और मंगलों के आश्रय स्थान हैं, उन परात्पर गणेश की मैं स्तुति करता हूँ।

इदं स्तोत्रं महापुण्यं विघ्नशोकहरं परम् ।
यः पठेत् प्रातरुत्थाय सर्वविघ्नात् प्रमुच्यते ।। 3 ।।

अर्थात् :- यह उत्तम स्तोत्र महान् पुण्यमय तथा विघ्न और शोक को हरने वाला है। जो प्रातःकाल उठकर इस स्तोत्र का पाठ करता है, वह सम्पूर्ण विघ्नों से विमुक्त हो जाता है।

।। इस प्रकार श्रीब्रह्मवैवर्तपुराण के अन्तर्गत श्रीकृष्णजन्मखण्ड में विघ्ननाशकगणेशस्तोत्र सम्पूर्ण हुआ ।।

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