Shanivar Vrat Katha / शनिवार व्रत कथा और पूजा विधि

Shanivar Vrat Katha

Shanivar Vrat Katha Aur Puja Vidhi, शनिवार व्रत कथा और पूजा विधि :- इस दिन शनिदेव की पूजा और व्रत का विधि विधान है। प्रातःकाल स्नान आदि करने के उपरान्त भगवान् शनिदेव की पूजा कर व्रत का संकल्प ले। काला तिल, लोहा, काला वस्त्र, काली मूँग, तेल जो कि शनि को अत्यन्त प्रिय हैं, इन्हीं से पूजा करना श्रेयस्कर होता है। ताँबे के पात्र में तेल, पैसा रखकर दान करना चाहिए। इस दिन बहुओं को मायके नहीं भेजना चाहिए। इस व्रत को करने से समस्त बाधाएँ दूर हो जाती है।

Shukravar Vrat Katha / शुक्रवार व्रत कथा और पूजा विधि

Shukravar Vrat Katha Aur Puja

Shukravar Vrat Katha Aur Puja Vidhi, शुक्रवार व्रत कथा और पूजा विधि :- हर शुक्रवार को माता संतोषी की पूजा व्रत का विधि-विधान है। इस दिन संतोषी माँ की पूजा करके गुड़, चने की दाल का भोग लगाना चाहिए। इस दिन खट्टी वस्तुएँ नहीं खानी चाहिए। गुड़-चना संयुक्त हाथों से माता की पूजा कर उसे गौ को खिला देना चाहिए। इस दिन संतोषी माँ की विधि वत् कथा सुननी चाहिए।

Guruvar Vrat Katha / गुरुवार व्रत कथा और पूजा विधि

Guruvar Vrat Katha

Guruvar Vrat Katha Aur Puja Vidhi, गुरुवार व्रत कथा और पूजा विधि :- इस दिन भगवान् बृहस्पति की पूजा करने से धन, विद्या, पुत्र व अन्य मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस दिन प्रातःकाल स्नान आदि करने के उपरान्त भगवान् बृहस्पति की पूजा करने के साथ व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इस दिन पीली गाय के घी से बनाये गये पदार्थों से ब्राह्मण-भोजन कराना चाहिए। इस दिन पीली वस्तुओं के दान तथा भक्षण का विशेष महत्त्व है। इस दिन पुरुष को बाल तथा दाढ़ी नहीं बनाना चाहिए।

Budhwar Vrat Katha / बुधवार व्रत कथा और पूजा विधि

Budhwar Vrat Katha

Budhwar Vrat Katha Aur Puja Vidhi, बुधवार व्रत कथा और पूजा विधि :- ग्रह शान्ति तथा सर्व-सुखों की इच्छा रखने वालों को बुधवार का पूजन और  चाहिए। इस दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर गंध-पुष्पादि से बुध भगवान् की पूजा कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इस दिन नवजात शिशु के हाथों से करवाये गए कृत्य से समस्त मनोकामनाएँ फलवती होती हैं। इस दिन उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए। इस दिन हरे रंग की वस्तुओं का प्रयोग तथा दान अत्यन्त लाभदायी है।

Mangalvar Vrat Katha / मंगलवार व्रत कथा और पूजा विधि

Mangalvar Vrat Katha

Mangalvar Vrat Katha Aur Puja Vidhi, मंगलवार व्रत कथा और पूजा विधि :- यह दिन भगवान् हनुमान जी का है इसलिए इस दिन सिंदूर आदि चढ़ाकर ‘ हनुमान चालीसा ‘ का पाठ करना चाहिए। इस दिन गोबर-मिटटी से चौका देना निषिद्ध है। हनुमान जी का दिन मंगलवार को पूजा करना चाहिए। हनुमान जी के साथ भगवान् राम और सीता जी का भी पूजन करना चाहिए। मंगल की प्रिय वस्तुओं में लाल चन्दन, लाल पुष्प तथा गुड़ मिश्रित पकवान माना जाता है। इसी दिन व्रती को सांयकाल अलोना ( बिना नमक का ) भोजन करना चाहिए।

Somvar Vrat Katha / सोमवार व्रत कथा और पूजा विधि

Somvar Vrat Katha

Somvar Vrat Katha Aur Puja Vidhi, सोमवार व्रत कथा और पूजा विधि :- वैसे सामान्यतया यह व्रत चैत्र, वैशाख, श्रावण तथा कार्तिक में भी किया जाता है, परन्तु सावन में इसका अधिक महत्त्व है। इस दिन प्रातःकाल स्नान आदि करने के उपरान्त पूजा करने के साथ व्रत का संकल्प लें। सोमवार के दिन व्रत रहकर भगवान् शंकर तथा पार्वती जी की पूजा करनी चाहिए। इस प्रकार दिन में एक बार भोजन करना चाहिए। यह व्रत करने से स्त्रियों को पति-पुत्रों का सुख प्राप्त होता है।

Ravivar Vrat Katha / रविवार व्रत कथा और पूजा विधि

Ravivar Vrat Katha

Ravivar Vrat Katha Aur Puja Vidhi, रविवार व्रत कथा और पूजा विधि :- सप्ताह के प्रत्येक रविवार को भगवान् सूर्य की उपासना, पूजा-अर्चना और व्रत का विधि-विधान है। सात दिन व्रत रहकर भगवान् सूर्य की पूजा लाल चन्दन तथा लाल पुष्प से करनी चाहिये। रविवार व्रत रहने वाले को नमक, तेल नहीं खाना चाहिए। इस प्रकार नियमित व्रत रहने से दाद, कोढ़, आँख पीड़ा आदि असाध्य रोगों से छुटकारा मिल जाता है। अर्घ्यदानादि देने के पश्चात् सूर्य की कथा सुननी चाहिये।

Karva Chauth Vrat Puja Vidhi / करवा चौथ व्रत पूजा विधि

Karva Chauth Vrat Puja Vidhi

Karva Chauth Vrat Puja Vidhi, करवा चौथ व्रत पूजा विधि :- कार्तिक मास की चतुर्थी अर्थात् करवा चौथ के व्रत और पूजन का विधि-विधान है। कार्तिक मास की चतुर्थी अर्थात् करवा चौथ के दिन लकड़ी का पाट पूरकर उस पर जल का भरा लोटा रखें। बायना निकालने के लिए एक मिट्टी का करवा रखकर करवे में गेहूँ व उसके ढक्कन में चीनी तथा नकद रूपये रखें। फिर उसे रोली से बाँध कर गुड़-चावल से पूजा करें।

Pradosh Vrat Katha / प्रदोष व्रत कथा और पूजा विधि

Pradosh Vrat Katha

Pradosh Vrat Katha Aur Puja Vidhi, प्रदोष व्रत कथा और पूजा विधि :- यह मुख्यतया स्त्रियों का व्रत है। ‘ प्रदोष ‘ का तात्पर्य है रात का शुभारम्भ। इसी बेला में पूजन होने के कारण यह ‘ प्रदोष ‘ नाम से प्रख्यात है। प्रत्येक पक्ष जी त्रयोदशी को होने वाला यह व्रत सन्तान-कामना-प्रधान है। इस दिन प्रातः काल स्नान आदि करने के उपरान्त भगवान् शंकर की पूजा करके व्रत का संकल्प लें। धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प, गंध आदि भगवान् को अर्पित करें। इस व्रत के मुख्य देवता आशुतोष भगवान् शंकर माने जाते हैं।

Shri Satyanarayan Vrat Katha / श्री सत्यनारायण व्रत कथा

Shri Satyanarayan Vrat Katha

Sri Satyanarayan Vrat Katha Aur Puja Vidhi, श्री सत्यनारायण व्रत कथा और पूजा विधि :- श्री सत्यनारायण व्रत किसी भी दिन किया जा सकता है, फिर भी हमारे देश में प्रायः पूर्णमासी के दिन श्री सत्यनारायण की कथा कराने का अधिक प्रचार है। प्रातःकाल ही इस व्रत का संकल्प लेकर दिन-भर निराहार रह कर भगवान् का ध्यान और गुणगान करते रहे। सांयकाल स्नान करके पूजन की तैयारी करे। केले के खम्भों और आम के पत्तों के बन्दनवारों से एक सुन्दर मण्डप बनाकर सुन्दर चौकी पर भगवान् की प्रतिमा स्थापित करें।

Ausan Bibi Ki Puja Vrat Katha / औसान बीबी की पूजा व्रत कथा

Ausan Bibi Ki Puja Vrat Katha

Ausan Bibi Ki Puja Vrat Katha Aur Puja Vidhi, औसान बीबी की पूजा व्रत कथा और पूजा विधि :- औसान बीबी की पूजा का शुद्ध रूप अवसान विधि की पूजा है। हमारे देश के पूर्वी प्रान्तों में इसे अचानक देवी व्रत कहते हैं। इस दिन प्रातः काल स्नान आदि कर स्त्रियाँ यह व्रत और पूजा करती हैं। विवाहादि शुभ कार्योपरान्त 7 सधवा स्त्रियों को आमंत्रित करके उनके सुहाग की पूजा की जाती है। भगवान् राम-सीता के विवाहोपरान्त जनकपुरी से लौटने पर राजा दशरथ ने सुहागिन स्त्रियों को सम्मानित किया था।

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