Kokila Vrat Katha Aur Puja Vidhi / कोकिला व्रत कथा

Kokila Vrat Katha Aur Puja Vidhi

Kokila Vrat Katha Aur Puja Vidhi, कोकिला व्रत कथा और पूजा विधि :- आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी से लेकर सावन मास की पूर्णिमा को कोकिला व्रत किया जाता है। विशेष तौर पर यह दक्षिण भारत का व्रत है। इस व्रत में आदिशक्ति मां भगवती की कोयल रूप में पूजा की जाती है। इसे सौभाग्यवती औरतें ही किया करती हैं।

Guru Purnima Vrat Katha / गुरु पूर्णिमा व्रत कथा

Guru Purnima Vrat Katha

Guru Purnima Vrat Katha Aur Puja Vidhi, गुरु पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा विधि :- गुरु पूर्णिमा आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा को ”व्यासपूर्णिमा” के नाम से भी जाना जाता है। प्राचीन काल में विद्यार्थी जब गुरुकुलों में निःशुल्क शिक्षा-दीक्षा प्राप्त करते थे, उस समय इस पूजा का आयोजन धूमधाम से होता था। अब भी गुरु पूजा का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है।

Devshayani Ekadashi Vrat Katha / देवशयनी एकादशी व्रत कथा

Devshayani Ekadashi Vrat Katha

Devshayani Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, देवशयनी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- पुराणों में ऐसा उल्लेख मिलता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चार मास की अवधि तक बलिद्वार पाताल लोक में निवास करते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को प्रत्यागमन करते हैं। इसी कारण इसे ‘हरिशयनी एकादशी’ तथा कार्तिक वाली एकादशी को ‘प्रबोधिनी’ के नाम से जाना जाता है। आषाढ़ मास से कार्तिक तक के समय को ‘चातुर्मास्य’ कहते हैं।

Sri Jagannath Rath Yatra / श्री जगन्नाथ रथ यात्रा

Sri Jagannath Rath Yatra

Sri Jagannath Rath Yatra, श्री जगन्नाथ रथ यात्रा :- आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया को रथ यात्रा का यह उत्सव मनाया जाता है। इस दिन भगवान का रथ सुभद्रा सहित बड़ी धूमधाम से निकाला जाता है। इस दिन भगवान् का रथ सुभद्रा सहित बड़ी धूमधाम से निकाला जाता है। जगन्नाथ पूरी में भगवान जगदीश का जो रथ निकाला जाता है, वह पुरे भारत में विख्यात है।

Yogini Ekadashi Vrat Katha / योगिनी एकादशी व्रत कथा

Yogini Ekadashi Vrat Katha

Yogini Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, योगिनी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह एकादशी आषाढ़ कृष्णपक्ष में मनाई जाती है। आषाढ़ मास की कृष्ण एकादशी को ” योगिनी ” अथवा ” शयनी ” एकादशी कहते है। इस व्रत कथा के वक्ता श्रीकृष्ण एवं मार्कण्डेय हैं। योगिनी एकादशी आषाढ़ कृष्णपक्ष में मनाई जाती है। इस दिन प्रातःकाल स्नान आदि करने के उपरांत व्रत रखकर भगवान नारायण की मूर्ति को स्नान कराके भोग लगाते हुए पुष्प, धूप, दीप से आरती उतारनी चाहिए।

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