Margashirsha Purnima Vrat Katha / मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत

Margashirsha Purnima Vrat Katha

Margashirsha Purnima Vrat Katha Aur Puja Vidhi, मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत मार्गशीर्ष की पूर्णिमा को होता है। इस दिन भगवान् नारायण की पूजा की जाती है। सबसे पहले नियमपूर्वक पवित्र होकर स्नान करें और सफ़ेद कपडे पहिने, फिर आचमन करें। इसके बाद व्रत रखने वाले ‘ॐ नमो नारायणाय’ कहकर आवाहन करें तथा आसन और गन्ध-पुष्प आदि भगवान् को अर्पण करें। भगवान् के सामने चौकोर वेदी बनावें जिसकी लम्बाई व चौड़ाई एक-एक हाथ हो।

Mokshda Ekadashi Vrat Katha / मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

Mokshda Ekadashi Vrat Katha

Mokshda Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, मोक्षदा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- अगहन शुक्ल पक्ष एकादशी दत्त जयन्ती तथा ‘मोक्षदा’ एकादशी के नाम से प्रसिद्ध है। इसी दिन भगवान् श्री कृष्ण ने महाभारत युद्ध प्रारम्भ होने के पूर्व मोहित हुए अर्जुन को श्रीमद्-भगवद्गीता का उपदेश दिया था। इस दिन श्रीकृष्ण व भगवद्गीता की पूजन-आरती करके, उसका पाठ करना चाहिए। गीता में भगवान् श्रीकृष्ण ने कर्मयोग पर विशेष बल दिया है तथा आत्मा को अजर-अमर-अविनाशी बताया है।

Utpanna Ekadashi Vrat Katha / उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा

Utpanna Ekadashi Vrat Katha

Utpanna Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष में किया जाता है। इस दिन भगवान् श्रीकृष्ण की पूजा का विधि-विधान है। व्रत रहने वाले को दशमी के दिन-रात में भोजन न करना चाहिये। उत्पन्ना एकादशी के दिन ब्रह्म वेला में ही भगवान् की पुष्प, जल, धुप, दीप, अक्षत से पूजन करके नीराजन करना चाहिए। इस व्रत में केवल फलों का ही भोग लगाया जाता है। ब्रह्मा, विष्णु, महेश, त्रिदेवों का संयुक्त अंश मन जाता है। यह मोक्ष देने वाला व्रत है।

Kaal Bhairav Jayanti Vrat Katha / काल भैरव जयंती व्रत कथा

Kaal Bhairav Jayanti Vrat Katha

Kaal Bhairav Jayanti Vrat Katha Aur Puja Vidhi, काल भैरव जयंती व्रत कथा और पूजा विधि :- मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष अष्टमी को भैरव-जयन्ती मनाई जाती है। इसे ‘ कालाष्टमी ‘ भी कहते हैं। इसी तिथि को भैरव जी का जन्म हुआ था। इस दिन प्रातः काल स्नान आदि नित्य क्रिया के उपरान्त पूजा करने के समय व्रत का संकल्प लें। इस दिन व्रत रहकर जल अर्घ्य देकर भैरव-पूजन करना चाहिए। इनकी सवारी कुत्ते के पूजन का नियम है।

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