Sharad Purnima Vrat Katha / शरद पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा

Sharad Purnima Vrat Katha

Sharad Purnima Vrat Katha Aur Puja Vidhi, शरद पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा विधि :- आश्विन शुक्ल पूर्णिमा को ‘ शरत् पूर्णिमा ‘ कहा जाता है। धर्म शास्त्रों में इस दिन ‘ कोजागर व्रत ‘ माना गया है। इसी को ‘ ‘ कौमुदी व्रत ‘ भी कहते हैं। रसोत्सव का यह दिन वास्तव में भगवान् कृष्ण ने जगत् की भलाई के लिए निर्धारित किया है, क्योंकि कहा जाता है कि इस रात्रि को चन्द्रमा की किरणों से सुधा झरती है।

Padmanabh Dwadashi Vrat Katha / पद्मनाभ द्वादशी व्रत कथा

Padmanabh Dwadashi Vrat Katha

Padmanabh Dwadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, पद्मनाभ द्वादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत आश्विन शुक्ल पक्ष को किया जाता है। इस तिथि को भगवान् पद्मनाभ की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान् जाग्रतवस्था प्राप्त करने के लिए अँगड़ाई भरते हैं तथा पद्मासीन ब्रह्मा ‘ॐ कार’ ध्वनि करते हैं। इस दिन प्रातः काल स्नान आदि करने के उपरांत व्रत करने का संकल्प लें। इस दिन भगवान् पद्मनाभ की पूजा और व्रत करने का विधि-विधान है।

Varaha Chaturdashi Vrat Katha / वाराह चतुर्दशी व्रत कथा

Varaha Chaturdashi Vrat Katha

Varaha Chaturdashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, वाराह चतुर्दशी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत आश्विन शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को किया जाता है। इस तिथि को वाराह की पूजा का विधि-विधान है। इस दिन भगवान् वाराह की पूजा का विधि विधान है। इसी दिन वाराह अवतार माना जाता है। इस दिन भगवान् वाराह की पूजा का विधि विधान है। इसी दिन वाराह अवतार माना जाता है।

Papankusha Ekadashi Vrat Katha / पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

Papankusha Ekadashi Vrat Katha

Papankusha Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, पापांकुशा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- आश्विन शुक्ल पक्ष एकादशी को यह व्रत किया जाता है। यह एकादशी पापरूपी हाथी को महावत रूपी अंकुश से बेधने के कारण पापांकुशा कहलाती है। पापांकुशा एकादशी के दिन सुबह स्नान आदि करने के उपरान्त भगवान् विष्णु की पूजा करने और व्रत करने का विधि-विधान है। इस दिन भगवान् विष्णु की पूजा अर्चना कर, ब्राह्मण-भोजन कराना वांछनीय है।

Maa Durga Ke Nau Rupon Ki Katha / माँ दुर्गा के नौ रूप

Maa Durga Ke Nau Rupon Ki Katha

Maa Durga Ke Nau Rupon Ki Katha, माँ दुर्गा के नौ रूपों की कथा :- Mahakali, महाकाली, Mahalakshmi, महालक्ष्मी, Mahasaraswati Ya Chamunda, महासरस्वती या चामुण्डा, Yogmaya, योगमाया, Raktdantika, रक्तदन्तिका, Shakambhari, शाकम्भरी, Maa Sridurga, माँ श्रीदुर्गा, Bhramari, भ्रामरी, Chandika, चण्डिका।

Dussehra Vijayadashami / दशहरा विजयादशमी

Dussehra Vijayadashami

Dussehra Vijayadashami, दशहरा विजयादशमी :- यह पर्व आश्विन शुक्ल पक्ष दशमी को मनाया जाता है। भगवान् राम ने इसी दिन लंका पर चढ़ाई करके विजय प्राप्त की थी। ‘ ज्योतिर्निबन्ध ‘ में लिखा है कि आश्विन शुक्ला दशमी को तारा उदय होने के समय ‘ विजय ‘ नामक काल होता है। वह सब कार्यों को सिद्ध करने वाला होता है। विजया दशमी हमारा राष्ट्रीय पर्व है।

Durga Ashtami Ki Vrat Katha / दुर्गा अष्टमी की व्रत कथा

Durga Ashtami Ki Vrat Katha

दुर्गा अष्टमी की व्रत कथा, Durga Ashtami Ki Vrat Katha :- हिन्दुओं के प्राचीन शास्त्रों के अनुसार दुर्गा देवी नौ रूपों में प्रकट हुई हैं। उन सब रूपों की पृथक्-पृथक् कथाएँ इस प्रकार हैं। महाकाली, Mahakali, महालक्ष्मी, Mahalakshmi, महासरस्वती, Mahasaraswati, योगमाया, Yogmaya, रक्तदन्तिका, Raktdantika, शाकम्भरी, Shakambhari, माँ श्रीदुर्गा, Maa Shridurga, भ्रामरी, Bhramari, चण्डिका, Chandika .

Ashok Vrat Katha Aur Puja Vidhi / अशोक व्रत कथा और पूजा

Ashok Vrat Katha

Ashok Vrat Katha Aur Puja Vidhi, अशोक व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस दिन अशोक वृक्ष की पूजा करने और व्रत करने का विधि विधान है। इस दिन अशोक वृक्ष की पूजा करने और व्रत करने का विधि विधान है। प्रातःकाल स्नानादि करने के उपरान्त अशोक वृक्ष की पूजा कर व्रत करने का संकल्प लें।

Navratri Stuti / नवरात्रि स्तुति

Navratri Stuti

नवरात्रि स्तुति, Navratri Stuti- मंगल की सेवा सुन मेरी देवा हाथ जोड़ कर तेरे द्वार खड़े । पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरे भेंट धरे ।। सुन जगदम्बे कर न विलम्बे सन्तन की भण्डार भरे । सन्तन प्रतिपाली सदा कुशाली जय काली कल्याण करे ।। बुद्धि विधाता तू जगमाता मेरा कारज सिद्ध करे । चरण कमल का लिया आसरा शरण तुम्हारी आन परे ।।

Navratri Vidhi Pujan / नवरात्रि विधि पूजन

Navratri Vidhi Pujan

Navratri Vidhi Pujan, नवरात्रि विधि पूजन :- आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक यह व्रत मनाया जाता है। आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन प्रातः अभ्यंग स्नानादि करके संकल्प करें तथा स्वयं या पंडितों द्वारा मिट्टी की वेदी बनाकर जौ बोना चाहिए। उसी पर घट स्थापन करें। घट के ऊपर कुल-देवी की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन करें तथा ‘ दुर्गासप्तशती ‘ का पाठ करायें। पाठ पूजन के समय दीप अखण्ड जलता रहना चाहिए।

Pitra Visarjan Amavasya Vrat Katha / पितृ विसर्जन अमावस्या

Pitra Visarjan Amavasya Vrat Katha

Pitra Visarjan Amavasya Vrat Katha Aur Puja Vidhi, पितृ विसर्जन अमावस्या व्रत कथा और पूजा विधि :- आश्विन अमावस्या ही पितृ-विसर्जन अमावस्या के नाम से पुकारी जाती है। इस दिन ब्राह्मण-भोजन तथा दानादि से पितर तृप्त होते हैं। ऐसी मान्यता है कि विसर्जन के समय वे अपने पुत्रों को आशीर्वाद देकर जाते हैं। इस दिन सुबह स्नान आदि के उपरान्त पितरों की पूजा करें। इस दिन ब्राह्मण-भोजन तथा दानादि से पितर तृप्त होते हैं।

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