Chaitra Purnima Vrat Katha / चैत्र पूर्णिमा व्रत कथा

Chaitra Purnima Vrat Katha

Chaitra Purnima Vrat Katha Aur Puja Vidhi, चैत्र पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा विधि :- प्रत्येक मास की पूर्णिमा तिथि पवित्र मानी गई है। इस दिन गंगा नदी, सरोवर आदि में स्नान दान करने से एक मास तक स्नान का फल प्राप्त होता है। हिन्दुओं के घरों में स्त्रियाँ भगवान लक्ष्मी नारायण को प्रसन्न करने के लिए यह व्रत धारण करती हैं और सत्यनारायण प्रभु की कथा सुनी जाती है। चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जी का जन्म भी रहता है। ऐसे में यह पूर्णिमा और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है।

Kamada Ekadashi Vrat Katha / कामदा एकादशी व्रत कथा

Kamada Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi

Kamada Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, कामदा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- कामदा एकादशी चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत-पूजन करने से अधूरी मनोकामनाएं विष्णु भगवान पूरी करते हैं। इसलिए इसे फलदा एकादशी या कामदा एकादशी कहा जाता है।

Ramnavmi Vrat Katha Aur Puja Vidhi / रामनवमी व्रत कथा और पूजा

Ramnavmi Vrat Katha Aur Puja Vidhi

Ramnavmi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, रामनवमी व्रत कथा और पूजा विधि : रामनवमी पूजा मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को महारानी कौशल्या की कोख से हुआ था। इसलिए यह रामनवमी के नाम से पुकारी जाती है। पुरे भारतवर्ष के हिन्दू परिवार में खासतौर पर राम का यह जन्म-महोत्सव मनाया जाता है। प्रत्येक राम मन्दिर में भक्तों द्वारा राम का गुणगान किया जाता है।

Ashok Ashtami Vrat Katha Aur Puja / अशोक अष्टमी व्रत कथा

Ashok Ashtami Vrat Katha Aur Puja

Ashok Ashtami Vrat Katha Aur Puja Vidhi, अशोक अष्टमी व्रत कथा और पूजा विधि :- अशोक अष्टमी का त्यौहार चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस दिन अशोक वृक्ष के पूजन का विधि विधान बताया जाता है। अशोक अष्टमी व्रत के बारे में गरुड़ पुराण में भगवान ब्रह्मा के द्वारा बताया गया है, इसके कारण से इस दिन की बहुत महत्ता है। इसी दिन चिरवियोगिता सीता जी को अशोकवाटिका में हनुमान जी द्वारा अँगूठी तथा सन्देश प्राप्त हुआ था।

Ganesh Damnak Chaturthi Vrat / गणेश दमनक चतुर्थी व्रत

Ganesh Damnak Chaturthi Vrat Katha

Ganesh Damnaka Chaturthi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, गणेश दमनक चतुर्थी व्रत कथा और पूजा विधि : हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार चैत्रसुदी मध्याह्न चतुर्थी को गणेश दमनक चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन बुद्धि के देवता प्रथम पूज्य श्री गणेश जी की पूजा अर्चना की जाती है। चैत्रसुदी मध्याह्न चतुर्थी को मोदक आदि से गणपति का पूजन कर दमन का आरोपण करें तो विघ्नों का नाश तथा सब कामनाओं की पूर्ति होगी। इस दिन व्रत रखने विशेष महत्त्व है।

Gangaur Vrat Katha Pujan Aur Vidhi / गनगौर व्रत कथा पूजा

Gangaur Vrat Katha Pujan Aur Vidhi

Gangaur Vrat Katha Pujan Aur Vidhi, गनगौर व्रत कथा पूजन और विधि- गनगौर व्रत चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। इस दिन सधवा स्त्रियाँ व्रत रखती हैं। कहा जाता है कि इस दिन भगवान् शंकर ने अपनी अर्धांगिनी पार्वती को तथा पार्वती ने तमाम स्त्रियों को सौभाग्य का वरदान दिया था। पूजन के समय रेणुका की गौरी ( गौर ) बनाकर उस पर चूड़ी, महावर, सिन्दूर चढ़ाने का विशेष फल है। चन्दन, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य से पूजन करने, सुहाग-सामग्री चढ़ाने तथा भोग लगाने का नियम है।

Navratri Durgapujan Vrat Katha / नवरात्रि दुर्गापूजन व्रत

Navratri Durgapujan Vrat Katha

Navratri Durgapujan Vrat Katha, नवरात्रि दुर्गापूजन व्रत कथा- चैत्रशुक्ल प्रतिपदा से लेकर रामनवमी तक चलता है। इन दिनों भगवती दुर्गा तथा कन्या पूजन का बड़ा महत्त्व है। प्रतिपदा के ही दिन से घट-स्थापना तथा जौ बौने की क्रिया भक्तों द्वारा सम्पादित की जाती है। ‘दुर्गा सप्तशती’ के पाठ का भी विधान है। नौ दिन पाठ के अनन्तर हवन तथा ब्राह्मण भोजन कराना वांछनीय है।

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