Papmochani Ekadashi Vrat Katha / पापमोचनी एकादशी व्रत कथा

Papmochani Ekadashi Vrat Katha

Papmochani Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, पापमोचनी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत चैत्र मास कृष्ण पक्ष एकादशी को किया जाता है। इस दिन भगवान् विष्णु को अर्घ्यदान आदि देकर पूजा करनी चाहिये। इस दिन प्रातः काल स्नान आदि करने के उपरान्त भगवान् विष्णु की पूजा करने के उपरान्त व्रत का संकल्प लें। धूप, दीप, नैवेद्य आदि से भगवान् का पूजन करें। 

Basoda Vrat Katha / बासोड़ा व्रत कथा और पूजा विधि

Basoda Vrat Katha

Basoda Vrat Katha Aur Puja Vidhi, बासोड़ा व्रत कथा और पूजा विधि :- यह त्यौहार होली के सात-आठ दिन बाद अर्थात् चैत्र कृष्णपक्ष में प्रथम सोमवार या वृहस्पति को मनाया जाता है। इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है। बासोड़ा के एक दिन पहले गुड़ या चीनी का मीठा भात आदि बनाना चाहिये। मोंठ बाजरा भिगोकर तथा रसोई की दीवाल धोकर हाथ सहित पाँचों ऊँगली घी में डुबोकर एक छापा लगाना चाहिये। रोली, चावल चढ़ाकर शीतला माता के गीत गाना चाहिये।

Sapda Ka Dora Vrat Katha / सांपदा का डोरा व्रत कथा

Sapda Ka Dora Vrat Katha

Sapda Ka Dora Vrat Katha Aur Puja Vidhi, सांपदा का डोरा व्रत कथा और पूजा विधि :- साँपदा का डोरा होली के दूसरे दिन अर्थात् चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा के दिन लिया जाता है तथा वैशाख कृष्ण पक्ष के किसी शुभ मुहूर्त में खोला जाता है। कच्चे सूत का सोलह तार का डोरा जो जलती होली को दिखाकर रख लेते हैं उसमें सोलह गाँठ लगा देनी चाहिए। फिर उसे हल्दी में रँग देना चाहिए। एक पट्टे पर जल भरा लोटा रखकर उस पर रोली से सतिया बनावें। तत्पश्चात् चावल ( अक्षत ) चढ़ाना चाहिए।

Dhulika Parv / धूलिका पर्व

Dhulika Parv

Dhulika Parv, धूलिका पर्व :- चैत्रमास कृष्ण पक्ष प्रतिपदा परिवा अर्थात् होली के बाद धूलिका त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन होली की अवशिष्ट राख की बंदना की जाती है। वैदिक मंत्रों से अभिषिक्त उस राख को सभी लोग मस्तक पर लगाते हुए एक-दूसरे से प्रेम पूर्वक मिलते हैं। दिन के दूसरे पहर में रंग, गुलाल, अबीर, कुमकुम, केसर की सावनी बौछार लगाई जाती है।

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