Holi Ke Geet / होली के गीत

Holi Ke Geet

Holi Ke Geet, होली के गीत- जा साँवरिया के संग, रंग मैं कैसे होली खेलूँ री । कोरे-कोरे कलश भराये, जामैं घोरौ है ये रंग ।।भर पिचकारी सन्मुख मारी, चोली है गई तंग । रंग० । ढोलक बाजै, मजीरा बाजै और बाजै मृदंग, कान्हाजी की वंशी बाजै, राधाजी के संग । रंग० ।

Holi Ki Puja Vidhi / होली की पूजा विधि

Holi Ki Puja Vidhi

Holi Ki Puja Vidhi, होली की पूजा विधि :- होली के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पहले हनुमान जी, भैरों जी आदि देवताओं की पूजा करें। फिर उन पर जल, रोली,  मौली,चावल, फूल, प्रसाद, गुलाल, चन्दन, नारियल आदि चढ़ावें। दीपक से आरती करके दंडवत करें। फिर सबको रोली से तिलक लगा दें और जिन देवताओं को आप मानते हों उनकी पूजा करें। फिर थोड़े से तेल को सब बच्चों का हाथ लगाकर किसी चौराहे पर भैरों जी के नाम से ईंट पर चढ़ा देवें।

Holika Dahan Katha / होलिका दहन कथा और पूजा विधि

Holika Dahan Katha

Holika Dahan Katha Aur Puja Vidhi, होलिका दहन कथा और पूजा विधि :- यह त्यौहार फाल्गुन की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह हिन्दुओं का बहुत बड़ा त्यौहार है। इस दिन सभी स्त्री-पुरुष एवं बच्चे होली का पूजन करते हैं। पूजन करने के बाद होलिका को जलाया जाता है। इस पर्व पर व्रत भी करना चाहिए। होली के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पहले हनुमान जी, भैरों जी आदि देवताओं की पूजा करें। फिर उन पर जल, रोली,  मौली,चावल, फूल, प्रसाद, गुलाल, चन्दन, नारियल आदि चढ़ावें।

Khatu Shyam Ji Ki Vrat Katha / खाटू श्याम जी की व्रत कथा

Khatu Shyam Ji Ki Vrat Katha

Khatu Shyama Ji Ki Vrat Katha Aur Puja Vidhi, खाटू श्याम जी की व्रत कथा और पूजा विधि :- फाल्गुन शुक्ल पक्ष द्वादशी को श्याम जी की जात लगाई जाती है। एक जगह थोड़ी सी मिट्टी बिछाकर उसके ऊपर एक घी का दीपक रखें। दीपक के नीचे थोड़ा चावल भी रखें। फिर दीपक के आगे आग रखना चाहिए। अग्नि में घी डालें। रोली, चावल, जल, फूल तथा नारियल आदि चढ़ाकर दण्डवत करें। इस दिन ब्राह्मण-भोजन भी कराना चाहिये। प्रसाद उसी दिन खा लेना चाहिये।

Amalaki Ekadashi Vrat Katha / आमलकी एकादशी व्रत कथा

Amalaki Ekadashi Vrat Katha

Amalaki Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, आमलकी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत फाल्गुन शुक्ल एकादशी को किया जाता है। आँवले के वृक्ष में भगवान् का निवास होने के कारण इसका पूजन किया जाता है। इस दिन प्रातःकाल स्नान आदि करने के उपरान्त भगवान् विष्णु की पूजा आँवले के वृक्ष नीचे करें और व्रत का संकल्प लें। धूप, दीप, नैवेद्य आदि से भगवान् की पूजा अर्चना करें।

Holi Ka Badkulla Puja Vidhi / होली का बड़कुल्ला पूजा विधि

Holi Ka Badkulla Puja Vidhi

Holi Ki Badkulla Puja Vidhi, होली का बड़कुल्ला पूजा विधि :- यह त्यौहार होली के पन्द्रह दिन पहले कोई शुभ दिन देखकर गाय के गोबर से सात बड़कुल्ला ( गूलरी ) बनावें। इसके बाद अपनी जितनी इच्छा होवे उतने और बड़कुल्ला तथा नारियल, पाल आदि सब तरह के खिलौने बना लेवें। फिर फाल्गुन शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन गोबर की 5 ढाल, एक तलवार, चन्द्रमा, सूरज, नारियल तथा आधी रोटी, एक होलिका माता और एक पान बनावें। यदि आपके कोई बेटा हुए का अथवा बेटे के विवाह का कोई उजमन होता हो तो तेरह गोबर की सुपारी भी बना लेवें।

Aas Mata Ki Puja Vrat Katha / आस माता की पूजा व्रत कथा

Aas Mata Ki Puja Vrat Katha

Aas Mata Ki Puja Vrat Katha Aur Puja Vidhi, आस माता की पूजा व्रत कथा और पूजा विधि :- आसमाता का व्रत फाल्गुन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से लेकर अष्टमी तक किसी भी शुभ दिन कर लेना चाहिये। व्रत के दिन एक पट्टे पर जल का लोटा रखें। लोटे पर रोली से एक सातिया बनावें और चावल चढ़ावें। सात दानें गेहूँ के हाथ में लेकर आसमाता की कहानी सुनें। फिर सीरा, पूड़ी तथा रूपये का बायना निकाल कर अपनी सासु जी को पाँव लग कर देवें। इसके बाद स्वयं भोजन करें।

Mahashivratri Vrat Katha / महाशिवरात्रि व्रत कथा और पूजा

Mahashivratri Vrat Katha Aur Puja Vidhi

Mahashivratri Vrat Katha Aur Puja Vidhi, महाशिवरात्रि व्रत कथा और पूजा विधि :- फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को शिवरात्रि का महोत्सव मनाया जाता है। त्रयोदशी को एक बार भोजन करके चतुर्दशी को दिन भर अन्न न ग्रहण करना चाहिए। काले तिलों से स्नान करके रात्रि में विधिवत् शिव-पूजन करना चाहिए। शिवजी के सबसे प्रिय पुष्पों में मदार, कनेर, बेलपत्र तथा मौलसरी हैं। किन्तु पूजन-विधान में बेलपत्र सबसे प्रमुख है। शिवजी पर पका आम चढाने से विशेष फल प्राप्त होता है।

Vijaya Ekadashi Vrat Katha / विजया एकादशी व्रत कथा और पूजा

Vijaya Ekadashi Vrat Katha

Vijaya Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, विजया एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत फाल्गुन कृष्ण पक्ष एकादशी को किया जाता है। इस दिन भगवान् विष्णु की पूजा करने से अत्यन्त पुण्य होता है। इस दिन प्रातः काल स्नान आदि करने के उपरान्त भगवान् विष्णु की पूजा करके व्रत का संकल्प लें। पूजन में धूप, दीप, नैवेद्य, नारियल आदि चढ़ाये जाते हैं। सप्त-अन्न युक्त घट स्थापन किया जाता है। घट के ऊपर विष्णु की मूर्ति रखी जाती है।

Janki Navami Vrat Katha / जानकी नवमी व्रत कथा और पूजा

Janki Navami Vrat Katha

Janki Navami Vrat Katha Aur Puja Vidhi, जानकी नवमी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत फाल्गुन कृष्ण पक्ष नवमी को किया जाता है। समस्त सुहाग सामग्रियों से भगवती सीता का पूजन किया जाता है। वैष्णव धर्म-ग्रंथों के अनुसार इसी दिन जानकी जी का जन्म हुआ था। इस दिन प्रातःकाल स्नान आदि नित्य क्रिया के उपरान्त पूजा कर व्रत का संकल्प लें। पूजन क्रिया में चावल, जौ, तिल आदि का हवन किया जाता है। इस व्रत को करने से सन्तान-लाभ तथा समस्त मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।

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