Ganga Dussehra Vrat Katha / गंगा दशहरा व्रत कथा

Ganga Dussehra Vrat Katha

Ganga Dussehra Vrat Katha Aur Puja Vidhi, गंगा दशहरा व्रत कथा और पूजा विधि :- ज्येष्ठ सुदी दशमी को गंगा दशहरा कहा जाता है। इस दिन नदियों में श्रेष्ठ गंगा जी भगीरथ द्वारा स्वर्गलोग से पृथ्वी पर अवतीर्ण हुई थीं। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को सोमवार तथा हस्त नक्षत्र होने पर यह तिथि घोर पापों को नष्ट करने वाली मानी गई है। हस्त नक्षत्र में बुधवार के दिन गंगावतरण हुआ था, इसलिए यह तिथि में स्नान, दान, तर्पण से दश पापों का विनाश होता है, इसलिए इसका नाम दशहरा पड़ा।

Vatsavitri Puja Vidhi Aur Vrat Katha / वटसावित्री पूजा

Vatsavitri Puja Vidhi Aur Vrat Katha

Vatsavitri Puja Vidhi Aur Vrat Katha, वटसावित्री पूजा विधि और व्रत कथा :- ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को वटसावित्री व्रत मनाया जाता है। इस दिन सत्यवान, सावित्री तथा यमराज सहित पूजा की जाती है। तत्पश्चात फल का भक्षण करना चाहिए। यह व्रत रहने वाली स्त्रियों का सुहाग अचल होता है। सावित्री ने इसी व्रत के प्रभाव से अपने मृतक पति सत्यवान को धर्मराज से जीत लिया था।ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु व् डालियों में भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है।

Achala Ekadashi Vrat Katha / अचला एकादशी व्रत कथा

Achala Ekadashi Vrat Katha

Achala Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, अचला एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- अचला एकादशी ज्येष्ठ मास के में मनाया जाता है। यह अचला तथा ‘ अपरा ‘ दो नामों से जाना जाता है। इस व्रत के करने से ब्रह्महत्या, परनिन्दा, भूत-योनि-जैसे निष्कृष्ट कर्मों से छुटकारा मिल जाता है। इसके करने से कीर्ति, पुण्य तथा धन में अभिवृद्धि होती है। हिन्दू धर्म के अनुसार अचला एकादशी व्रत रखने से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्रतियों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

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