Kartik Purnima Vrat Katha / कार्तिक पूर्णिमा व्रत कथा

Kartik Purnima Vrat Katha

Kartik Purnima Vrat Katha Aur Puja Vidhi, कार्तिक पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा विधि :- कार्तिक पूर्णिमा को ‘त्रिपुरी पूर्णिमा’ भी कहते हैं। इस तिथि को भगवान् मतस्यावतार हुआ था। इस दिन गंगा-स्नान, दीप-दान, अन्य दान आदि का विशेष महत्त्व है। त्रिदेवों ने इसे ‘ महापुनीत पर्व ‘ कहा है। इस तिथि को अगर कृत्तिका नक्षत्र पर चन्द्र हो तथा विशाखा नक्षत्र पर सूर्य, तब ‘ पद्म योग ‘ होता है, जिसका बहुत बड़ा महत्त्व है।

Bhishma Panchak Vrat Katha / भीष्म पंचक व्रत कथा और पूजा

Bhishma Panchak Vrat Katha

Bhishma Panchak Vrat Katha Aur Puja Vidhi, भीष्म पंचक व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी से प्रारम्भ होकर पूर्णिमा को समाप्त होता है। इसको ‘पंचभीका’ भी कहते हैं। इस व्रत की शुरूआत महाभारत काल में हुई थी और पितामह भीष्म के नाम पर इस व्रत का नाम भीष्म पंचक व्रत पड़ा। दरअसल महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद पितामह भीष्म जब शरशैय्या पर पड़े हुए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा में मृत्यु के दिन गीन रहे थें, जब भगवान् श्री कृष्ण ने पाण्डवों को उनसे शिक्षा ग्रहण करने भेजा था।

Vaikuntha Chaturdashi Vrat Katha / वैकुण्ठ चतुर्दशी व्रत

Vaikuntha Chaturdashi Vrat Katha

Vaikuntha Chaturdashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, वैकुण्ठ चतुर्दशी व्रत कथा और पूजा विधि :- कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को यह व्रत मनाया जाता है। इस तिथि को वैकुण्ठ वासी भगवान् श्री विष्णु की विधिवत् अर्चना की जाती है। इस तिथि को वैकुण्ठ वासी भगवान् श्री विष्णु की विधिवत् पूजा अर्चना कर व्रत किया जाता है। इस दिन प्रातः काल स्नान आदि करके भगवान् विष्णु और माँ लक्ष्मी की विधिवत् पूजा करके व्रत का संकल्प लें। प्रसन्न मन चित्त से भगवान् विष्णु को पुष्प, धूप-दीप, चन्दन आदि सुगन्धित पदार्थों से आरती करें।

Tulsi Vivah Vrat Katha / तुलसी विवाह व्रत कथा और पूजा

Tulsi Vivah Vrat Katha Aur Puja Vidhi

Tulsi Vivah Vrat Katha Aur Puja Vidhi, तुलसी विवाह व्रत कथा और पूजा विधि :- कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को कार्तिक स्नान करने वाली स्त्रियाँ तुलसी जी तथा शालग्राम का विवाह करती हैं। प्रातःकाल स्नान आदि नित्यक्रिया के उपरान्त विवाहित स्त्रियाँ बड़े ही धूमधाम से तुलसी जी तथा शालग्राम का विवाह करती हैं। समस्त विवाह को विधि-विधान से, खूब गाजे-बाजे के साथ तुलसी के बिरवे से शालग्राम के फेरे एक सुन्दर मण्डप के नीचे डाले जाते हैं। विवाह में गीत तथा भजन गाने की प्रथा है।

Devutthana Ekadashi Vrat Katha / देवोत्थान एकादशी व्रत कथा

Devutthana Ekadashi Vrat Katha

Devutthana Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, देवोत्थान एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी को देवोत्थान या ‘देवउठनी’ एकादशी होती है। इस दिन प्रातः काल स्नान आदि नित्य क्रिया के उपरान्त भगवान् विष्णु और माँ लक्ष्मी की पूजा करने और व्रत करने का विधि विधान है। इस दिन शालिग्राम और तुलसी की पूजा होती है और उनके विवाह का आयोजन भी किया जाता है।

Amla Navami Vrat Katha / आंवला नवमी व्रत कथा और पूजा

Amla Navami Vrat Katha

Amla Navami Vrat Katha Aur Puja Vidhi, आंवला नवमी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी को ‘आँवला नवमी’ के नाम से विख्यात है। सतयुग का प्रारम्भ भी इसी दिन हुआ था। इस तिथि को गौ, सुवर्ण, वस्त्र आदि दान देने से ब्रह्महत्या-जैसे महापातक से भी छुटकारा मिल जाता है। इस दिन आँवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। पूजन-विधान में प्रातः स्नान आदि नित्य क्रिया करके शुद्धात्मा से आँवले के वृक्ष के नीचे पूर्व दिशा की ओर उन्मुख होकर षोडशोपचार पूजन करना चाहिए।

Gopashtami Vrat Katha / गोपाष्टमी व्रत कथा और पूजा

Gopashtami Vrat Katha

Gopashtami Vrat Katha Aur Puja Vidhi, गोपाष्टमी व्रत कथा और पूजा विधि :- कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी को ‘गोपाष्टमी’ नाम से पुकारा जाता है। इस तिथि में गायों को स्नान कराके बछड़े सहित उनकी विधिवत् पूजा करनी चाहिए। प्रातःकाल स्नान आदि करने के उपरान्त गायों को स्नान कराके बछड़े सहित उनकी विधिवत् पूजा करनी चाहिए। जल, अक्षत, रोली, गुड़, जलेबी, वस्त्र तथा धूप-दीप से आरती उतार कर परिक्रमा करनी चाहिये। इसके पश्चात् भोजन करना चाहिए।

Surya Shashti Vrat Katha / सूर्य षष्ठी व्रत कथा और पूजा

Surya Shashti Vrat Katha

Surya Shashti Vrat Katha Aur Puja Vidhi, सूर्य षष्ठी व्रत कथा और पूजा विधि :- कार्तिक मास की शुक्ला षष्ठी को यह व्रत मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देवता की पूजा का विशेष माहात्म्य है। इसे करने वाली स्त्रियाँ धन-धान्य, पति-पुत्र तथा सुख-समृद्धि से परिपूर्ण तथा संतुष्ट रहती हैं। चर्म रोग और आँख की बीमारी से भी सबको छुटकारा मिल जाता है। पूजा तथा अर्घ्यदान देते समय सूर्य-किरण अवश्य देखना चाहिए। पूजन विधि में फल, पकवान, मिष्टान्न, आदि का महत्त्व है।

Bhaiya Dooj Vrat Katha / भैया दूज व्रत कथा और पूजा

Bhaiya Dooj Vrat Katha Aur Puja Vidhi

Bhaiya Dooj Vrat Katha Aur Puja Vidhi, भैया दूज व्रत कथा और पूजा विधि :- यह त्यौहार कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को मनाया जाता है। यह भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। इस दिन भाई-बहन को साथ-साथ यमुना स्नान करना, तिलक लगवाना तथा बहिन के घर भोजन करना अति फलदायी होता है। इस दिन बहन, भाई की पूजा कर उसके दीर्घायु तथा अपने सुहाग की कामना से हाथ जोड़ यमराज से प्रार्थना करती है। इसी दिन सूर्यतनया यमुना जी ने अपने भाई यमराज को भोजन कराया था।

Govardhan Puja Vrat Katha / गोवर्धन पूजा व्रत कथा और पूजा

Govardhan Puja Vrat Katha

Govardhan Puja Vrat Katha Aur Puja Vidhi, गोवर्धन पूजा व्रत कथा और पूजा विधि :- कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा की ( दिवाली के अगले दिन ) अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है। इसी दिन बलि पूजा, गोवर्धन पूजा, मार्गपाली आदि होते हैं। इस दिन गोबर का अन्नकूट बनाकर या उसके समीप विराजमान श्रीकृष्ण के सम्मुख गाय तथा ग्वाल-बालों की पूजा की जाती है। यह ब्रजवासियों का मुख्य त्यौहार है। इस दिन मंदिरों में विविध प्रकार की खाद्य-सामग्रियों से भगवान् का भोग लगाया जाता है।

Mata Lakshmi Ji Ki Kahani / माता लक्ष्मी जी की कहानी

Mata Lakshmi Ji Ki Kahani

Mata Lakshmi Ji Ki Kahani, माता लक्ष्मी जी की कहानी :- एक साहूकार की बेटी थी। वह रोजाना पीपल सींचने जाया करती थी। पीपल में से लक्ष्मी जी निकलतीं और चली जाती थीं। एक दिन लक्ष्मी जी ने साहूकार की बेटी से कहा कि मेरी सहेली बन जा, तब साहूकार की बेटी ने कहा कि मैं पिताजी से पूछ आऊँ, तब कल सहेली बन जाऊँगी। घर जाकर उसने अपने पिताजी से सारी बात कह सुनाई। तब पिताजी ने कहा कि वह तो लक्ष्मी जी हैं और हमें क्या चाहिये। तू सहेली बन जा।

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