Magh Purnima Vrat Katha / माघ पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा

Magh Purnima Vrat Katha

Magh Purnima Vrat Katha Aur Puja Vidhi, माघ पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा विधि :- माघ पूर्णिमा का धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्त्व है। स्नान पर्वों का यह अन्तिम प्रतिक है। इस दिन भगवान् विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर विष्णु-पूजन, पितृ श्राद्ध-कर्म तथा भिखारियों को दान देने का विशेष फल है। माघ पूर्णिमा तिथि को मुख्यतया गंगा-स्नान करने से मनुष्य की भव-बाधाएँ कट जाती हैं।

Jaya Ekadashi Vrat Katha / जया एकादशी व्रत कथा और पूजा

Jaya Ekadashi Vrat Katha

Jaya Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, जया एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- माघ शुक्ल पक्ष एकादशी को जया एकादशी का व्रत किया जाता है। इस तिथि को भगवान् केशव ( कृष्ण ) की पुष्प, जल, अक्षत, रोली तथा विशिष्ट सुगन्धित द्रव्यों से पूजन करके आरती उतारनी चाहिए। भगवान् को भोग लगाये गये प्रसाद को भक्त स्वयं खायें। एक समय की बात है। इन्द्र की सभा में एक गन्धर्व गीत गा रहा था, परन्तु उसका मन अपनी नवयौवना सुन्दरी में आसक्त था।

Bhishma Ashtami Vrat Katha / भीष्म अष्टमी व्रत कथा और पूजा

Bhishma Ashtami Vrat Katha

Bhishma Ashtami Vrat Katha Aur Puja Vidhi, भीष्म अष्टमी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत माघ शुक्लपक्ष अष्टमी को होता है। इस दिन बाल-ब्रह्मचारी, कौरव-पाण्डवों के पूर्वज भीष्म पितामह की इच्छा-मृत्यु हुई थी। इस दिन प्रातःकाल स्नान आदि करने के उपरान्त भीष्म के नाम से पूजन तथा तर्पण करने से वीर तथा सत्यवादी सन्तान की उत्पत्ति होती है। एक समय की बात है राजा शांतनु शिकार खेलते हुए निषादराज की कन्या मत्स्यगंधा के द्वारा गंगा पार हुए।

Surya Saptami Vrat Katha / सूर्य सप्तमी व्रत कथा और पूजा

Surya Saptami Vrat Katha Aur Puja Vidhi

Surya Saptami Vrat Katha Aur Puja Vidhi, सूर्य सप्तमी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत माघ शुक्ल पक्ष सप्तमी को किया जाता है। इस दिन सूर्य भगवान् को गंगाजल से अर्घ्यदान देना चाहिए। इस दिन सूर्य भगवान् को गंगाजल से अर्घ्यदान देना चाहिए। सूर्य का दीपक, कपूर, धूप, लाल पुष्प आदि से स्तुति-पूजन करना चाहिए। ऐसा वैज्ञानिकों का मत है कि सूर्य की किरणों में कीटाणुनाशक तत्त्व पर्याप्त मात्रा में विध्यमान रहता है।

Basant Panchami Vrat Katha / बसंत पंचमी व्रत कथा और पूजा

Basant Panchami Vrat Katha

Basant Panchami Vrat Katha Aur Puja Vidhi, बसंत पंचमी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह उत्सव माघ शुक्ल पक्ष पंचमीं को मनाया जाता है। यह पर्व वास्तव में ऋतुराज बसंत की आगवानी की सूचना देता है। इस दिन से ही होरी तथा धमार गीत प्रारम्भ किये जाते हैं। गेहूँ तथा जौ की स्वर्णिम बालियाँ भगवान् को अर्पित की जाती हैं। भगवान् विष्णु तथा सरस्वती के पूजन का विशेष महत्त्व है। बसंत ऋतु कामोद्दीपक होती है, इसलिए चरक संहिताकार का कथन है कि इस ऋतु में स्त्रियों तथा वनों का सेवन का करना चाहिए।

Mauni Amavasya Vrat Katha / मौनी अमावस्या व्रत कथा और पूजा

Mauni Amavasya Vrat Katha

Mauni Amavasya Vrat Katha Aur Puja Vidhi, मौनी अमावस्या व्रत कथा और पूजा विधि :- माघ मास अमावस्या को ही ‘मौनी अमावस्या’ कहा जाता है। इस दिन मौन रहना चाहिए। मुनि शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति हुई है। इसलिए इस व्रत को मौन धारण करके समापन करने वाले को मुनि पद की प्राप्ति होती है। यह दिन सृष्टि संचालक मनु का ‘ जन्म दिवस ‘ भी है। इस दिन गंगा स्नान तथा दान-दक्षिणा का विशेष महत्त्व है। ऐसी मान्यता है कि मौन रहने से आत्मबल मिलता है।

Shattila Ekadashi Vrat Katha / षटतिला एकादशी व्रत कथा

Shattila Ekadashi Vrat Katha

Shattila Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, षटतिला एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत माघ कृष्ण पक्ष ‘ एकादशी ‘ को किया जाता है। इसके अधिष्ठाता देव भगवान विष्णु हैं। षट्तिला एकादशी के दिन प्रातः काल स्नान आदि करने के उपरान्त भगवान् विष्णु की पूजा कर व्रत का संकल्प लें। पंचामृत में तिल मिलाकर भगवान् को स्नान करायें। तिल मिश्रित पदार्थ को स्वयं खायें तथा ब्राह्मणों को खिलायें। दिन में हरि कीर्तन कर रात्रि में भगवान् की मूर्ति के सामने सोना चाहिए।

Shitla Shashti Vrat Katha / शीतला षष्ठी व्रत कथा और पूजा

Shitla Shashti Vrat Katha

Shitla Shashti Vrat Katha Aur Puja Vidhi, शीतला षष्ठी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत माघ कृष्ण पक्ष षष्ठी ( छठ ) को किया जाता है। इसके करने से आयु तथा सन्तान-कामना फलवती होती है। कहीं-कहीं इस दिन कुत्ते को भी टीका लगाकर तथा पकवान खिलाकर पूजते हैं। इस दिन व्रत रहने वाली स्त्री गर्म जल से स्नान न करें तथा गर्म भोजन भी न करना चाहिये। इसका महत्त्व ज्यादातर बंगाल देश में है। शीतला माता की षोड़शोपचार पूजा करके पापों के शमनार्थ प्रार्थना करनी चाहिये।

Ganesh Chaturthi Vrat Katha / गणेश चतुर्थी व्रत कथा

Ganesh Chaturthi Vrat Katha Aur Puja

Ganesh Chaturthi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, गणेश चतुर्थी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह व्रत माघ कृष्ण पक्ष चौथ को किया जाता है। इसी दिन विद्या-बुद्धि-वारिधि गणेश तथा चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए। दिन भर व्रत रहने के बाद सांयकाल चन्द्र दर्शन होने पर दूध का अर्घ्य देकर चन्द्रमा की विधिवत् पूजा की जाती है। गौरी-गणेश की स्थापना पर उनका पूजन तथा वर्ष भर उन्हें घर में रखा जाता है। नैवेद्य सामग्री, तिल, ईख, गंजी, अमरुद, गुड़ तथा घी से चन्द्रमा एवं गणेश को भोग लगाया जाता है।

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