Rakshabandhan Ki Katha / रक्षाबंधन की कथा

Rakshabandhan Ki Katha

Rakshabandhan Ki Katha, रक्षाबंधन की कथा :- यह त्यौहार सावन की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह भाई-बहन को स्नेह की डोर में बाँधने वाला त्यौहार है। इस दिन बहन  भाई के हाथ में राखी बाँधती है तथा मस्तक पर टीका लगाती है। रक्षा-बंधन का अर्थ है रक्षा + बन्धन = अर्थात् किसी को अपनी रक्षा के लिए बाँध लेना। राखी बाँधते समय बहन कहती है — हे भैया ! मैं तुम्हारी शरण में हूँ। मेरी सब प्रकार से रक्षा करना।

Putrada Ekadashi Vrat Katha / पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

Putrada Ekadashi Vrat Katha

Putrada Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, पुत्रदा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- पुत्रदा एकादशी सावन शुक्ल पक्ष में ‘पुत्रदा एकादशी’ के नाम से मनाई जाती है। इस दिन भगवान् विष्णु के नाम का व्रत रख कर पूजन करना चाहिये। जो भक्त एकादशी का व्रत पुरे विधि-विधान से करता है, उसकी समस्त मनोकामनाएं भगवान् विष्णु शीघ्र पूर्ण करते हैं। पुत्रदा एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान आदि करने के उपरान्त भगवान् विष्णु के नाम पर व्रत रख कर पूजन विधि-विधान से संकल्प लेकर करना चाहिये।

Naag Panchami Vrat Katha / नाग पंचमी व्रत कथा और पूजा

Naag Panchami Vrat Katha

Naag Panchami Vrat Katha Aur Puja Vidhi, नाग पंचमी व्रत कथा और पूजा विधि :- श्रावण शुक्ल पंचमी को नाग पंचमी कहते हैं। इस दिन नागों की पूजा की जाती है। गरुड़ पुराण में ऐसा सुझाव दिया गया है कि नागपंचमी के दिन घर के दोनों बगल में नाग की मूर्ति खींचकर अनन्तर प्रमुख महानागों का पूजन किया जाय। नाग पंचमी पंचमी नागों की तिथि है, ज्योतिष के अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी नाग हैं। अर्थात् शेष आदि सर्पराजों का पूजन पंचमी का होना चाहिए।

Kamika Ekadashi Vrat Katha / कामिका एकादशी व्रत कथा

Kamika Ekadashi Vrat Katha

Kamika Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, कामिका एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का महत्वपूर्ण स्थान है। कामिका एकादशी श्रावण कृष्ण पक्ष एकादशी को मनाई जाती है। इसे ‘पवित्रा’ के नाम से भी पुकारा जाता है। इस व्रत के कथा को सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। यह व्रत भगवान् विष्णु के लिए समर्पित पर्व है।  भगवान् विष्णु की पूजा के साथ ही माता लक्ष्मी, भगवान् शंकर और भगवान् गणेश की पूजा की जाती है।

Mangala Gauri Vrat Katha / मंगला गौरी व्रत कथा और पूजा

Mangala Gauri Vrat Katha

Mangala Gauri Vrat Katha Aur Puja Vidhi, मंगला गौरी व्रत कथा और पूजा विधि :- मंगला गौरी व्रत सावन में जितने भी मंगलवार आते हैं, रखा जाता है। इस दिन गौरी जी की पूजा करनी चाहिये। यह व्रत मंगलवार को किया जाता है, इस कारण इसको मंगला गौरी व्रत कहते हैं। यह व्रत स्त्रियों के लिए महत्त्वपूर्ण है। मंगला गौरी पूजन बहुत ही खास है इसके साथ भगवान् भोले शंकर का भी पूजा अर्चना किया जाता है।

Shiv Ji Ki Vrat Katha / शिव जी की व्रत कथा

Shiv Ji Ki Vrat Katha

Shiv Ji Ki Vrat Katha Aur Puja Vidhi, शिव जी की व्रत कथा और पूजा विधि :- श्रावण मास के समस्त सोमवारों के दिन यह व्रत मनाया जाता है। प्रत्येक सोमवार को गणेश, शिव, पार्वती तथा नन्दी की पूजा की जाती है। जल, दूध, शहद, घी चीनी, जनेऊ, रोली, बेल-पत्र, भाँग, धतूरा, धूप, दीप और दक्षिणा से भगवान् पशुपति का पूजन करना चाहिये। कपूर से आरती करके रात्रि में जागरण करें। सोलह सोमवार व्रत कथा माहात्म्य सुनना चाहिये।

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