Nirjala Ekadashi Vrat Katha / निर्जला एकादशी व्रत कथा

Nirjala Ekadashi Vrat Katha

Nirjala Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, निर्जला एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- ज्येष्ठ शुक्लपक्षीय एकादशी को निर्जला एकादशी या ‘ भीमसेनी एकादशी ‘ कहते हैं, क्योंकि वेदव्यास की आज्ञानुसार भीमसेन ने इसे धारण किया था। शास्त्रों के अनुसार इस एकादशी के व्रत से दीर्घायु तथा मोक्ष मिलता है। इस दिन जल नहीं पीना चाहिए। इस एकादशी के व्रत रहने से वर्ष की पूरी (24) एकादशियों का फल मिलता है।

Vaishakh Purnima Vrat Katha / वैशाख पूर्णिमा व्रत कथा

Vaishakh Purnima Vrat Katha

Vaishakh Purnima Vrat Katha Aur Puja Vidhi, वैशाख पूर्णिमा व्रत कथा और पूजा विधि :- साल के प्रत्येक महीने में कुल 12 पूर्णिमा होती हैं। हर पूर्णिमा की अपनी विशेष महत्त्व है। हमारे हिन्दु पंचांग का एक महत्त्वपूर्ण दिन होता है। इसी प्रकार वैशाखी पूर्णिमा का अपना अलग महत्त्व है। वैशाखी पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना और दान देना बहुत महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है। इस दिन पितरों को तर्पण करना बहुत ही शुभ माना गया है।

Aasmai Ki Puja Vidhi Vrat Katha / आसमाई की पूजा विधि

Aasmai Ki Puja Vidhi Vrat Katha

Aasmai Ki Puja Vidhi Vrat Katha, आसमाई की पूजा विधि व्रत कथा :- बैशाख, आषाढ़ तथा माघ इन तीनों महीनों के अन्तर्गत किसी रविवार को आसमाई की पूजा का विधान है। अधिकांशतः बाल-बच्चों वाली औरतें ही यह व्रत करती हैं। यह व्रत संतान की मंगल कामना व सुख-सौभाग्य के लिए किया जाता है। आसमाई की पूजा बैशाख, आषाढ़ तथा माघ इन तीनों महीनों के अन्तर्गत किसी रविवार को पूजा का विधि विधान है। अधिकांशतः बाल-बच्चों वाली औरतें ही यह व्रत करती हैं।

Sri Narsingh Vrat Katha / श्री नृसिंह व्रत कथा

Sri Narsingh Vrat Katha

Sri Narsingh Vrat Katha Aur Puja Vidhi, श्री नृसिंह व्रत कथा और पूजा विधि :- भगवान् श्रीनृसिंह शक्ति तथा पराक्रम के प्रमुख देवता हैं। वैशाख शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को नृसिंह भगवान् ने खम्भे को फाड़कर भक्त प्रह्लाद की रक्षार्थ अवतार लिया था। इसलिए इस दिन यह जयन्ती-समारोह मनाया जाता है। हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान् विष्णु ने अपने भक्त के कष्टों का नाश करने के लिए ‘नृसिंह रूप अवतार’ लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था।

Mohini Ekadashi Vrat Katha / मोहिनी एकादशी व्रत कथा

Mohini Ekadashi Vrat Katha

Mohini Ekadashi Vrata Katha Aur Puja Vidhi, मोहिनी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह बैशाख शुक्ल पक्ष एकादशी को मनाई जाती है। इसी दिन भगवान् पुरुषोत्तम ( राम ) के पूजा का विधान है। भगवान की प्रतिमा को स्नानादि से शुद्ध कराकर श्वेत वस्त्र पहनाना चाहिए। उच्चासन पर बैठाकर धूप, दीप से आरती उतारते हुए मीठे फलों से भोग लगाना चाहिए। प्रसाद वितरित कर ब्राह्मण-भोजन तथा दान-दक्षिणा देनी चाहिए।

Akshaya Tritiya Vrat Katha / अक्षय तृतीया व्रत कथा

Akshaya Tritiya Vrat Katha

Akshaya Tritiya Vrata Katha Aur Puja Vidhi, अक्षय तृतीया व्रत कथा और पूजा विधि :- वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया के नाम से पुकारा गया है। इस दिन किये गये होम, जप, तप, स्नान आदि अक्षय रहते हैं, ऐसी मान्यता है। यह तिथि परशुराम का जन्मदिन होने के कारण ‘परशुराम’ तीज भी कही जाती है। त्रेतायुग का आरम्भ भी इसी तिथि से हुआ है। इस दिन गंगा स्नान का बड़ा भारी माहात्म्य है।

Varuthini Ekadashi Vrat Katha / वरुथिनी एकादशी व्रत कथा

Varuthini Ekadashi Vrat Katha

Varuthini Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, वरुथिनी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- वरुथिनी एकादशी हिन्दुओं का त्यौहार है जिसमें भगवान्य विष्णु के वाराह अवतार की पूजा पुरे विधि-विधान से पूजन एवं व्रत होता है। बैशाख कृष्ण पक्ष में एकादशी के दिन मनाई जाती है। यह व्रत सुख-सौभाग्य का प्रतीक है। सुपात्र ब्राह्मण को दान देने, करोड़ो वर्ष तक ध्यान मग्न तपस्या करने तथा  कन्यादान के भी फल से बढ़कर ‘ वरुथिनी एकादशी ‘ का व्रत है।

Sheetala Ashtami Vrat Katha / शीतला अष्टमी व्रत कथा

Sheetala Ashtami Vrat Katha

Sheetala Ashtami Vrat Katha Aur Puja Vidhi, शीतला अष्टमी व्रत कथा और पूजा विधि :- शीतला अष्टमी हिन्दुओं का त्यौहार है जिसमें माँ शीतला की पुरे विधि-विधान से पूजन एवं व्रत होता है। माता शीतला की पूजा वैशाख कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को होती है परन्तु कुछ स्थानों पर इनकी पूजा होली के बाद पड़ने वाले पहले सोमवार अथवा गुरुवार के दिन ही की जाती है। भगवती शीतला की पूजा का विधान भी विशिष्ट होता है।

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