Yogini Ekadashi Vrat Katha / योगिनी एकादशी व्रत कथा

Yogini Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi
योगिनी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि


Yogini Ekadashi Vrat Katha Aur Puja Vidhi, योगिनी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि :- यह एकादशी आषाढ़ कृष्णपक्ष में मनाई जाती है। आषाढ़ मास की कृष्ण एकादशी को ” योगिनी ” अथवा ” शयनी ” एकादशी कहते है। इस व्रत कथा के वक्ता श्रीकृष्ण एवं मार्कण्डेय हैं।  

योगिनी एकादशी पूजा विधि महत्त्व :-

योगिनी एकादशी आषाढ़ कृष्णपक्ष में मनाई जाती है। इस दिन प्रातःकाल स्नान आदि करने के उपरांत व्रत रखकर भगवान नारायण की मूर्ति को स्नान कराके भोग लगाते हुए पुष्प, धूप, दीप से आरती उतारनी चाहिए। गरीब ब्राह्मणों को दान देना परम श्रेयस्कर है। इस एकादशी के प्रभाव से पीपल वृक्ष के काटने से उत्पन्न पाप नष्ट हो जाते हैं और अन्त में स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है।

योगिनी एकादशी व्रत कथा :-

प्राचीन समय की बात। है। अलकापुरी में धनपति कुबेर के यहाँ एक हेम नामक माली रहता था। वह भगवान शंकर के पूजनार्थ नित्य प्रति मानसरोवर से फूल लाया करता था।

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